यूरोप इस वक्त इतिहास की सबसे भीषण और जानलेवा गर्मी (Europe Heatwave) की चपेट में है, जिसने फ्रांस में अब तक का सबसे कड़ा तापमान दर्ज किया है। मौसम विभाग (Météo-France) के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। इस हाहाकार के बीच फ्रांस में 40 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिसने पूरे वैश्विक मीडिया और सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है। लेकिन इस मौतों के पीछे की जो मुख्य वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक है।
दरअसल, फ्रांस के प्रशासनिक प्रमुख और खेल मंत्री ने पुष्टि की है कि इन 40 से अधिक मौतों में से अधिकांश मौतें सीधे सनस्ट्रोक (लू) से नहीं, बल्कि बिना निगरानी वाले क्षेत्रों (Unsupervised Areas) में डूबने (Drownings) के कारण हुई हैं। भीषण और दम घोंटने वाली गर्मी से फौरी राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं और लोगों ने नदियों, झीलों और समुद्र के उन प्रतिबंधित या असुरक्षित तटों पर छलांग लगा दी, जहाँ कोई भाई लाइफगार्ड मौजूद नहीं था। पानी के तापमान में अचानक भारी अंतर (Cold Water Shock) और तेज धाराओं के कारण यह राहत पल भर में जानलेवा साबित हुई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यूरोप में आया यह विनाशकारी मौसम ‘ओमेगा ब्लॉक’ (Omega Block) नामक एक कड़क वायुमंडलीय पैटर्न के कारण पैदा हुआ है, जिसने गर्म हवा के एक विशाल गुब्बारे (Heat Dome) को फ्रांस के ऊपर लॉक कर दिया है। यह सिस्टम सहारा रेगिस्तान से आ रही अत्यधिक गर्म हवा को अपनी तरफ खींच रहा है, जिससे रात के समय भी तापमान 25-30 डिग्री से नीचे नहीं गिर रहा है। यह कड़ा और ऐतिहासिक मौसमी संकट उन वामपंथी और पर्यावरण-विरोधी सिंडिकेट्स के मुंह पर करारा तमाचा है, जो ग्लोबल वार्मिंग को महज एक कोरी अफवाह बताते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प के साथ भारत समेत दुनिया भर के विशेषज्ञ अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि क्लाइमेट चेंज के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की कड़क नीति अपनाना बेहद जरूरी हो चुका है।











