नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के मंच पर भारत की बादशाहत को एक नई ऊंचाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने बेहद महत्वपूर्ण और कड़क द्विपक्षीय दौरे पर फ्रांस और स्लोवाकिया के लिए रवाना हो गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल यूरोपीय यात्रा पर निकलने से ठीक पहले पीएम मोदी ने देश के नाम एक बेहद कड़ा और रणनीतिक बयान जारी किया। प्रधानमंत्री ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि उनका यह दौरा न केवल फ्रांस और स्लोवाकिया के साथ भारत के सदियों पुराने संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि यूरोप और दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के समूह G-7 (जी-7) के साथ भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को एक अभूतपूर्व और नई गति भी प्रदान करेगा।
अपने प्रस्थान वक्तव्य (Departure Statement) में पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि फ्रांस भारत का एक बेहद मजबूत और परखा हुआ रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ रक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ा सहयोग चल रहा है। वहीं, स्लोवाकिया की उनकी यह यात्रा किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही एक ऐतिहासिक यात्रा है, जिससे मध्य यूरोप के देशों के साथ भारत के व्यापारिक और तकनीकी रास्ते खुलेंगे। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के विशेष सत्रों में भी हिस्सा लेंगे, जहां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने, आतंकवाद के खिलाफ कड़े एक्शन और ग्रीन एनर्जी जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत का ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) नैरेटिव पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा जाएगा।
पीएम मोदी का यह आक्रामक और कड़ा यूरोपीय दौरा उन वामपंथी और कम्युनिस्ट सिंडिकेट्स के मुंह पर एक और करारा तमाचा है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने का झूठा प्रोपेगैंडा फैलाते रहते हैं। आज पूरी दुनिया और जी-7 के विकसित देश यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिरता के लिए भारत की ‘बेंच स्ट्रेंथ’ और पीएम मोदी का मजबूत नेतृत्व कितना अपरिहार्य है। रक्षा और व्यापारिक समझौतों के लिहाज से इस दौरे को गेम-चेंजर माना जा रहा है, जिसने वैश्विक पटल पर भारत विरोधी ताकतों के खेमे में पहले ही भारी बेचैनी पैदा कर दी है।











