नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार ने सुपरपावर अमेरिका के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना (US Navy) द्वारा भारतीय नाविकों (Indian Sailors) को निशाना बनाकर किए गए हमलों और बदसलूकी की घटनाओं पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अत्यंत तीखी और कड़े शब्दों में निंदा की है। जयशंकर ने अमेरिकी प्रशासन और वॉशिंगटन के शीर्ष अधिकारियों के सामने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए साफ कर दिया है कि नए भारत के नागरिकों की सुरक्षा और उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय (MEA) के सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं में अमेरिकी युद्धपोतों द्वारा भारतीय वाणिज्यिक नाविकों के साथ की गई कड़ाई और बल प्रयोग की घटनाओं पर भारत ने आधिकारिक तौर पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। डॉ. जयशंकर ने साफ शब्दों में अमेरिकी विदेश विभाग को चेतावनी दी कि दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक और रक्षा साझेदारी का मतलब यह कतई नहीं है कि भारतीय नागरिकों की संप्रभुता और सुरक्षा को ताक पर रख दिया जाए। उन्होंने इस पूरे मामले की तुरंत उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अमेरिकी नौसैनिकों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की दोटूक मांग की है।
जयशंकर का यह आक्रामक और कड़क रुख उन छद्म-सुरक्षा विश्लेषकों और वामपंथी टूलकिटधारियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो हमेशा यह झूठा नैरेटिव फैलाते थे कि भारत अमेरिकी कूटनीतिक दबाव के आगे झुक जाता है। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प के साथ काम कर रही मोदी सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि चाहे कोई भी वैश्विक महाशक्ति क्यों न हो, यदि भारतीय नागरिकों के हितों और उनकी सुरक्षा पर आंच आएगी, तो भारत उसका मुंहतोड़ और कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। इस कूटनीतिक तल्खी के बाद हिंद महासागर और वैश्विक समुद्री सुरक्षा के रणनीतिक समीकरणों में भारत की ‘बेंच स्ट्रेंथ’ और कड़क कूटनीति का लोहा पूरी दुनिया ने एक बार फिर माना है।











