नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत ने डिजिटल क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और कड़ा ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है। हाल ही में जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, कभी दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार के रूप में पहचाना जाने वाला भारत आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का निर्माता बनकर उभरा है। इस कड़क डिजिटल क्रांति ने भारत को केवल दूसरों पर निर्भर रहने वाले देश से हटाकर वैश्विक स्तर पर तकनीकी आत्मनिर्भरता के सिंहासन पर बैठा दिया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत देश में इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुकी है। इसके अलावा, भारत का डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर भी बेहद आक्रामक गति से बढ़ाया गया है, जिसकी क्षमता 2020 के 375 मेगावाट से चार गुना बढ़कर अब 1,500 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है। एडवांस टेक्नोलॉजी की बात करें तो 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू क्षमता विकसित की जा रही है, जो भारत के डिजिटल भविष्य को अजेय बनाने वाली है।
यह कड़ा और ठोस विकास उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और पश्चिमी आलोचकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो हमेशा भारत की डिजिटल क्षमता पर सवाल उठाते थे। ‘नेशन फर्स्ट’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही मोदी सरकार के कड़े फैसलों और ₹76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर मिशन ने वैश्विक तकनीकी ताकतों को भी भारत के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया है। यूपीआई और स्वदेशी सुपरकंप्यूटर ‘परम रुद्र’ जैसी जीती-जागती मिसालों के साथ भारत ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में अपनी रैंकिंग को सुधारकर अपनी कूटनीतिक और तकनीकी बेंच स्ट्रेंथ को पूरी दुनिया में लोहा मनवाया है।











