अमेरिका-ईरान जंग से वैश्विक बाजार में हड़कंप: तेल की कीमतें 3% से ज़्यादा उछलीं, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भयंकर तनाव!

लंदन/नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की कड़क मार अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और एनर्जी मार्केट पर पड़नी शुरू हो गई है। अमेरिकी हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच जारी भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 3% से अधिक का भयंकर उछाल दर्ज किया गया है। वैश्विक तेल आपूर्ति की सबसे संवेदनशील लाइफलाइन माने जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बढ़े सीधे तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को पूरी तरह सहमा दिया है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की किल्लत और मंदी का कड़ा खतरा मंदराने लगा है।

कमोडिटी मार्केट के इनपुट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत इस कड़क सैन्य संकट के बाद रॉकेट की तरह बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% हिस्सा कड़ाई से गुजरता है, वहां दोनों सेनाओं के युद्धपोतों की आक्रामक तैनाती से जहाजों की आवाजाही पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। शिपिंग कंपनियों ने इस रूट पर अपने इंश्योरेंस प्रीमियम को कड़ा कर दिया है, जिससे भारत सहित एशिया और यूरोप के तमाम देशों के लिए कच्चे तेल का आयात न सिर्फ महंगा हो गया है, बल्कि सप्लाई चेन भी बुरी तरह बाधित होने के कगार पर आ गई है।

वैश्विक बाजार में आया यह भयंकर उबाल उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और कूटनीतिक समीक्षकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो मध्य पूर्व के इस सैन्य संकट के आर्थिक दुष्परिणामों को लेकर लगातार आँखें मूंदे बैठे थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन पर काम कर रही भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी इस कड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को ‘बेंच स्ट्रेंथ’ के दम पर स्थिर रखा जा सके। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ा तनाव और बढ़ा, तो आने वाले दिनों में यह वैश्विक आर्थिक जंग का रूप ले सकता है, जिससे निपटने के लिए सभी बड़े देश अब ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

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