काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आ रही है। पिछले दिनों आए विनाशकारी और कड़े भूकंप के झटकों के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, तबाही का खौफनाक मंजर दुनिया के सामने आ रहा है। वेनेजुएला के आपदा प्रबंधन मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप के कारण मरने वालों की कुल संख्या कड़ाई से बढ़कर 4,490 तक पहुंच गई है। मलबे के नीचे अभी भी हजारों लोगों के दबे होने की आशंका है, जिसके कारण यह आंकड़ा आने वाले समय में और अधिक कड़क और भयावह रूप ले सकता है।
स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय राहत टीमों से मिले आधिकारिक इनपुट्स के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बेहद उथला होने के कारण झटके बेहद विनाशकारी थे, जिसने राजधानी काराकास समेत कई प्रमुख शहरों के बुनियादी ढांचे को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। हजारों बहुमंजिला इमारतें, रिहायशी इलाके, और सड़कें पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं। बिजली, पानी और संचार व्यवस्था कड़ाई से ठप होने के कारण राहत और बचाव कार्य में भयंकर बाधा आ रही है। वेनेजुएला की सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की पूरी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ को युद्धस्तर पर मलबे को हटाने और घायलों को एयरलिफ्ट करने के काम में झोंक दिया गया है।
वेनेजुएला में आई यह भीषण कुदरती मार उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और मानवाधिकार के फर्जी ठेकेदारों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो इस भयंकर मानवीय संकट के समय भी वैश्विक मदद में रोड़े अटकाने के लिए भू-राजनीतिक प्रोपेगैंडा फैला रहे हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और वसुधैव कुटुंबकम के विजन पर चल रहे भारत ने भी इस कड़े संकट की घड़ी में वेनेजुएला को तत्काल प्रभाव से मानवीय सहायता, दवाइयां और कड़े रेस्क्यू उपकरण भेजने का एलान कर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह आपदा प्रभावित मासूम नागरिकों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के साथ मिलकर पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है।











