भारत-UK व्यापार समझौता कड़ाई से लागू: 99% भारतीय निर्यात पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म, चीन को लगा तगड़ा झटका!

नई दिल्ली/लंदन: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को एक नए और कड़े स्वर्णिम युग में ले जाते हुए ऐतिहासिक ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) आज 15 जुलाई 2026 से कड़ाई से लागू हो गया है। वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर नए भारत की यह अब तक की सबसे कड़क और बड़ी जीत मानी जा रही है, जिसके तहत लगभग 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात (Tariff Lines) को ब्रिटिश बाजार में पूर्णतः ड्यूटी-फ्री (शून्य शुल्क) एक्सेस मिल गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन के बाद दोनों देशों के व्यापारिक सिंडिकेट्स में भारी उत्साह है और द्विपक्षीय व्यापार में रिकॉर्ड उछाल आने की कड़क उम्मीद है।
वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक इनपुट्स के मुताबिक, इस गेम-चेंजर समझौते से भारत के श्रम-प्रधान (Labour-Intensive) सेक्टर्स जैसे रेडीमेड गारमेंट्स, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते-चप्पल, कालीन, और समुद्री व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को सीधा और कड़ा फायदा होगा, जिन पर पहले 4% से 16% तक का भारी आयात शुल्क लगता था। इस कड़े शुल्क उन्मूलन के बाद ब्रिटिश बाजारों में भारतीय उत्पाद चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों को पछाड़कर पूरी तरह फ्रंट-फुट पर खेलेंगे। इसके साथ ही, समझौते के तहत ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) भी लागू हो गया है, जिससे ब्रिटेन में काम करने वाले 75,000 से अधिक भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कुशल कामगारों को 5 साल तक दोहरा सामाजिक सुरक्षा योगदान नहीं देना होगा, जिससे भारतीय कंपनियों को करोड़ों की कड़क बचत होगी।
भारत-UK के बीच यह कड़ा और पारदर्शी समझौता उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और पश्चिमी आलोचकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो दावा करते थे कि भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था के साथ कभी इतना महत्वाकांक्षी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू नहीं कर पाएगा। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और आत्मनिर्भरता के विजन पर चल रही मोदी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए डेयरी, कृषि, संवेदनशील स्मार्टफोन और पॉलिमर जैसे अपने घरेलू सेक्टर्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। वहीं, स्कॉच व्हिस्की (शुल्क 150% से घटकर 40%) और ब्रिटिश कारों (110% से घटकर 10% कोटा के तहत) पर शुल्क घटाकर भारत ने वैश्विक व्यापार की अपनी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ का लोहा मनवाया है, जो साबित करता है कि नया भारत दुनिया के साथ बराबरी की शर्तों पर कूटनीतिक और आर्थिक फैसले लेता है।

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