न्यूयॉर्क: भारत ने अंतरिक्ष को भविष्य का ‘युद्ध का मैदान’ बनने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ा रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में अपना पक्ष रखते हुए भारत ने वैश्विक समुदाय से आह्वान किया कि बाह्य अंतरिक्ष के सैन्यीकरण और वहां हथियारों की तैनाती पर प्रभावी रोक लगाने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी और व्यापक संधि तैयार की जानी चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधियों ने रेखांकित किया कि अंतरिक्ष मानवता की साझा धरोहर है और इसका उपयोग केवल शांतिपूर्ण व विकासात्मक कार्यों के लिए ही होना चाहिए। आधुनिक समय में उपग्रह आधारित संचार, मौसम पूर्वानुमान, नौवहन और वैज्ञानिक अनुसंधान पूरी दुनिया के जनजीवन से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में यदि अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ शुरू होती है, तो यह वैश्विक सुरक्षा, तकनीकी बुनियादी ढांचे और आम नागरिक सेवाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
भारत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी देशों की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक पारदर्शी और समावेशी वैश्विक व्यवस्था स्थापित की जाए। संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में बनने वाली यह संधि सभी सदस्य देशों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए, ताकि अंतरिक्ष की शांति और स्थि











