नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी का जलवा बरकरार: टीएमसी के पवित्र कार को 9,665 वोटों से दी शिकस्त, भाजपा की राज्य में प्रचंड जीत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक परिणामों में नंदीग्राम सीट एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में रही है, जहाँ भाजपा के दिग्गज नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने अपनी बादशाहत कायम रखी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी ने कड़े मुकाबले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार पवित्र कार को 9,665 मतों के अंतर से पराजित किया है। सुवेंदु अधिकारी को कुल 1,27,301 वोट मिले, जबकि टीएमसी के पवित्र कार 1,17,636 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। 19 राउंड की मैराथन गिनती के बाद मिली यह जीत भाजपा के लिए न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नंदीग्राम की जनता का भरोसा अब भी अधिकारी परिवार और भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि पवित्र कार, जो कभी सुवेंदु अधिकारी के करीबी माने जाते थे, उन्हें अभिषेक बनर्जी की विशेष रणनीति के तहत चुनावी मैदान में उतारा गया था, लेकिन वे अधिकारी के दुर्ग में सेंध लगाने में विफल रहे।

सुवेंदु अधिकारी की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इस बार दो सीटों—नंदीग्राम और भवानीपुर—से चुनाव लड़ा था। नंदीग्राम में जीत दर्ज करने के साथ ही उन्होंने भवानीपुर सीट पर भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के बड़े अंतर से हराकर राज्य की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। नंदीग्राम के नतीजों ने साफ कर दिया है कि 2007 के भूमि आंदोलन की विरासत और स्थानीय मुद्दों पर सुवेंदु की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी 2021 में थी। चुनाव परिणाम आने के बाद नंदीग्राम के चप्पे-चप्पे पर भगवा रंग छा गया है और समर्थक ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ जश्न मना रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने अपनी जीत का श्रेय नंदीग्राम की जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकासवादी विजन को दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि नंदीग्राम ने एक बार फिर ‘अन्याय’ के खिलाफ ‘न्याय’ को चुना है।

पश्चिम बंगाल के समग्र चुनाव परिणामों की बात करें तो भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ‘सोनार बांग्ला’ के अपने संकल्प को पूरा किया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस महज 81 सीटों पर सिमट गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और भ्रष्टाचार के मुद्दों ने टीएमसी के खिलाफ एक मजबूत माहौल तैयार किया, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। नंदीग्राम की इस महत्वपूर्ण जीत ने सुवेंदु अधिकारी के कद को पार्टी के भीतर और अधिक बढ़ा दिया है, और उन्हें राज्य के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव आयोग ने किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए राज्यभर में विजय रैलियों पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन नंदीग्राम से लेकर कोलकाता तक भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। इस हार ने टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर अभिषेक बनर्जी के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है, जिन्होंने नंदीग्राम की जिम्मेदारी स्वयं अपने कंधों पर ली थी।

 

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