दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य कर्नाटक की राजनीति में आज एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। कांग्रेस पार्टी के ‘संकटमोचक’ और प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार (DK Shivakumar) आज यानी बुधवार, 3 जून 2026 को शाम ठीक 4:05 बजे कर्नाटक के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु के राजभवन (लोक भवन) के ग्लास हाउस में आयोजित होने वाले एक गरिमापूर्ण समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस आलाकमान ने ढाई-ढाई साल के सत्ता हस्तांतरण फॉर्मूले (Power Sharing Formula) के तहत यह बड़ा फैसला लिया है। शिवकुमार के इस राजतिलक से राज्य की शक्तिशाली वोक्कालिगा कम्युनिटी और उनके समर्थकों में भारी उत्साह है, जबकि इसे सिद्धारमैया गुट के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
डी.के. शिवकुमार के साथ आज पहले चरण में 13 कैबिनेट मंत्री भी शपथ लेंगे, जिसमें जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा गया है। पार्टी ने अंदरूनी असंतोष को शांत करने के लिए वरिष्ठ दलित नेता जी. परमेश्वर (G. Parameshwara) को उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) नियुक्त करने का फैसला किया है। इसके अलावा, कैबिनेट सूची में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा नाम निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया (Yathindra Siddaramaiah) का है, जो पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर अपने कैबिनेट करियर की शुरुआत करेंगे। मंत्रियों की इस सूची में यू.टी. खादर (जिन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है), एम.बी. पाटिल, के.जे. जॉर्ज, के.एच. मुनियप्पा, सतीश जारकीहोली और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे शामिल हैं। शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित इंडी (INDIA) गठबंधन के कई बड़े नेता बेंगलुरु पहुंच चुके हैं।
राष्ट्रवादी विचारकों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डी.के. शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना कांग्रेस के भीतर आंतरिक खींचतान और ‘वंशवाद-तुष्टिकरण’ के एक नए दौर की शुरुआत है। भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में जेल की हवा खा चुके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपना यह दिखाता है कि कांग्रेस के लिए प्रशासनिक शुचिता से ज्यादा ‘पैसा और बाहुबल’ मायने रखता है। सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच पिछले कई महीनों से चल रही वर्चस्व की इस जंग ने कर्नाटक के विकास कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया था। अब सिद्धारमैया के बेटे को कैबिनेट में शामिल करना सीधे तौर पर उनके गुट को शांत रखने और परिवारवाद को बढ़ावा देने की मजबूरी को दर्शाता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आज ‘DK Shivakumar Karnataka CM Oath’ और ‘G Parameshwara Deputy CM’ सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है। विपक्ष (बीजेपी) ने इस नए घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा है कि यह ‘मजबूरी की सरकार’ कर्नाटक की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के बजाय केवल अंदरूनी कलह और मलाई बांटने में ही व्यस्त रहेगी।











