अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी व्यापार नीति को एक बार फिर बड़ी कानूनी हार का सामना करना पड़ा है। अमेरिका की एक फेडरल ट्रेड कोर्ट (यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड) ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत के वैश्विक टैरिफ (Global Tariff) को ‘अवैध’ करार देते हुए उसे तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। तीन जजों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रशासन ने व्यापार कानून की धारा 122 (Section 122 of the Trade Act of 1974) के तहत अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति द्वारा लगाया गया यह आयात शुल्क न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह उन विधिक प्रक्रियाओं का भी उल्लंघन करता है जो व्यापार संतुलन को नियंत्रित करती हैं। यह ट्रंप प्रशासन के लिए तीन महीनों के भीतर दूसरा बड़ा कानूनी झटका है, जिसने वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
यह मामला उस समय शुरू हुआ जब फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पिछले ‘लीबरेशन डे’ (Liberation Day) टैरिफ को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल कानूनों के तहत मनमाने ढंग से कर लगाने का अधिकार नहीं है। उस हार के तुरंत बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ‘बैकअप प्लान’ के तहत धारा 122 का उपयोग करते हुए 10% का वैश्विक टैरिफ घोषित कर दिया था, जिसे उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए ‘अपरिहार्य’ बताया था। हालांकि, फेडरल कोर्ट ने अपने नवीनतम फैसले में तर्क दिया कि अमेरिका ‘भुगतान संतुलन’ (Balance of Payments) के संकट से नहीं जूझ रहा है, जिसका आधार लेकर यह टैरिफ लगाया गया था। अदालत ने उन सभी कंपनियों और आयातकों को भुगतान किए गए टैरिफ की राशि ब्याज सहित वापस करने का भी आदेश दिया है, जिन्होंने इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी।
व्हाइट हाउस ने इस अदालती फैसले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है और इसे ‘अमेरिकी श्रमिकों के हितों पर प्रहार’ बताया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेगी। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती आदेश से उन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक भागीदारों को बड़ी राहत मिलेगी जो पिछले कई महीनों से अमेरिकी व्यापार युद्ध (Trade War) के दबाव में थे। हालांकि, बाजार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि कानूनी लड़ाई लंबी खिंचने से आयात-निर्यात क्षेत्र में अस्थिरता बनी रह सकती है। इस फैसले का असर वॉल स्ट्रीट पर भी देखने को मिला है, जहाँ वैश्विक व्यापार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन इस कानूनी बाधा को पार करने के लिए कोई नया विधायी रास्ता अपनाएगा या अपनी टैरिफ नीति में ढील देगा।











