नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन में आंशिक गिरावट के अनुमानों के बावजूद देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और हाल ही में कीमतों में हुई बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, हालिया मूल्य वृद्धि को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ना गलत है, क्योंकि इथेनॉल निर्माण में चीनी का उपयोग 2022-23 के 12% से घटकर वर्तमान में लगभग 9% रह गया है। अब देश में लगभग तीन-चौथाई इथेनॉल का उत्पादन अनाज, मुख्य रूप से मक्के से किया जा रहा है। मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जो शुरुआती अनुमानों से कम है। त्योहारी मांग, मौसम के प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के साथ-साथ सट्टेबाजी और जमाखोरी को कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण माना गया है।
बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने और अनुचित भंडारण पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत देशभर के चीनी डीलरों के लिए अधिकतम 400 टन स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित की गई है। साथ ही, थोक उपभोक्ताओं के लिए 15 दिनों की खपत से अधिक का स्टॉक रखने पर रोक लगा दी गई है, जिससे कृत्रिम कमी को रोका जा सके और उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी मिलती रहे।











