उत्तर प्रदेश में 2008-09 में बसपा सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में गरीब और दलित परिवारों को सस्ते दर पर पक्के मकान देने के उद्देश्य से ‘कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना’ शुरू की गई थी। इस योजना के तहत कई शहरों में फ्लैट और आवास बनाए गए, लेकिन समय के साथ इन पर अवैध कब्जों की शिकायतें बढ़ती गईं।
कई जिलों में ऐसे लोग इन मकानों में रहने लगे जो योजना के असली पात्र नहीं थे, जिससे जरूरतमंद दलित परिवार अपने हक से वंचित रह गए। इसी स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने 10 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में अवैध कब्जों को तुरंत खाली कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। खाली कराए गए मकानों की मरम्मत और रंगाई-पुताई के बाद उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को सौंपा जाएगा।
इसी कैबिनेट बैठक में गर्मियों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन को उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक के माध्यम से 2000 करोड़ रुपये का ऋण दिलाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। सरकार का उद्देश्य है कि गर्मी के मौसम में लोगों को बिजली कटौती की समस्या न झेलनी पड़े।
बैठक में विधानमंडल के शीतकालीन सत्र का सत्रावसान, CAG की 2025 की रिपोर्ट को राज्यपाल की अनुमति के बाद विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने और पीएसी वाहिनी के लिए 46 नए वाहनों की खरीद जैसे अन्य प्रशासनिक प्रस्ताव भी पास किए गए।











