दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रक और बसें हटाने की योजना को मंजूरी, 2 लाख से अधिक वाहन मालिकों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के खिलाफ चल रही जंग और सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में आज एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार और परिवहन मंत्रालय ने दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों से 10 से 15 साल पुराने प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल ट्रकों और बसों को सड़कों से हटाने (Scrapping) की एक व्यापक और समयबद्ध योजना को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस योजना के लागू होने से दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के 2 लाख से अधिक वाहन मालिकों को सीधा आर्थिक लाभ और सरकारी प्रोत्साहन मिलने जा रहा है।

इस नीति के तहत जो भी वाहन मालिक अपने पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले ट्रक या बस को स्क्रैप (कबाड़) करेंगे, उन्हें नई कमर्शियल गाड़ी खरीदने पर भारी छूट दी जाएगी। इसमें नए वाहन के रजिस्ट्रेशन फीस की पूरी माफी, रोड टैक्स में 25% तक की बड़ी रियायत और ऑटोमोबाइल कंपनियों की तरफ से 5% तक का विशेष डिस्काउंट शामिल है। इस कड़े प्रशासनिक फैसले से जहां दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की सर्दियों और स्मॉग के दौरान होने वाले जानलेवा प्रदूषण में 40% तक की कमी आने की उम्मीद है, वहीं स्क्रैपिंग के जरिए देश में ही स्टील और एल्युमिनियम को रीसायकल कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी एक नई रफ्तार मिलेगी।

यह ऐतिहासिक कदम उन विदेशी और वामपंथी दबाव समूहों के मुंह पर करारा तमाचा है जो हमेशा भारत के विकास और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रदूषण के नाम पर घेरने की कोशिश करते हैं। मोदी सरकार की ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और ग्रीन मोबिलिटी नीति के कारण अब राजधानी की सड़कों पर केवल आधुनिक, सुरक्षित और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन ही चलेंगे। इससे न केवल सड़कों पर होने वाले हादसों में कमी आएगी, बल्कि पुराने वाहनों के रखरखाव पर होने वाले भारी-भरकम खर्च से भी ट्रांसपोर्टर्स को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

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