H-1B वीज़ा पर अमेरिका का नया रुख: विदेशी विशेषज्ञ आएंगे, ट्रेनिंग देकर वापस लौटेंगे

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अमेरिका ने अपनी नई H-1B वीज़ा नीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीति का लक्ष्य विदेशी कुशल विशेषज्ञों को अस्थायी तौर पर अमेरिका बुलाना है—ताकि वे अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षित कर सकें, न कि उनकी नौकरियाँ छीनें। बेसेंट ने साफ कहा कि यह वीज़ा मॉडल अस्थायी ज्ञान-हस्तांतरण (knowledge transfer) के लिए बनाया गया है और विशेषज्ञ प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपने देश वापस लौट जाएंगे

“ट्रेन करें और वापस जाएं” — अमेरिकी नीति की नई दिशा

फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में बेसेंट ने नई वीज़ा प्रणाली को सीधे तौर पर एक “ज्ञान हस्तांतरण योजना” बताया। उनके शब्दों में—
“अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षित करें। फिर घर वापस जाएं। इसके बाद अमेरिकी वर्कर पूरा काम संभाल लेंगे।”

निर्माण से सेमीकंडक्टर तक – अमेरिका तैयार कर रहा है नया वर्कफ़ोर्स

नई H-1B नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य उन क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना है जिन्हें दशकों की आउटसोर्सिंग ने कमजोर कर दिया था। नीति मुख्य रूप से निम्न उद्योगों को पुनर्निर्मित करने पर केंद्रित है—

  • अमेरिकी विनिर्माण (Manufacturing)

  • जहाज निर्माण (Shipbuilding)

  • सेमीकंडक्टर उत्पादन

बेसेंट के अनुसार वर्षों से अमेरिका ने अपने देश में जहाज बनाना और सेमीकंडक्टर निर्माण लगभग बंद कर दिया था, इसलिए विदेशी साझेदारों को बुलाकर अमेरिकी कामगारों को स्किल्ड बनाना आवश्यक हो गया है।

अस्थायी वीज़ा = अस्थायी विशेषज्ञता आयात

बेसेंट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य H-1B जैसे प्रोग्राम्स का उपयोग सीमित अवधि के लिए विशेषज्ञता आयात करने में करना है। यह नीति अमेरिका की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें—

  • महत्वपूर्ण उद्योगों को वापिस अमेरिका में लाना,

  • सप्लाई चेन को मजबूत करना,

  • और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना शामिल है।

ट्रंप की टिप्पणी से उठे सवाल

दिलचस्प बात यह है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप की विदेशी श्रम पर टिप्पणियाँ उनके कई MAGA समर्थकों में भ्रम पैदा कर चुकी हैं। हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि—
“अमेरिका में कुछ प्रतिभाएँ नहीं हैं… हमें तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत है।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि बेरोजगार अमेरिकियों को अचानक हाई-टेक काम पर नहीं लगाया जा सकता—
“आप किसी को बेरोज़गारी की लाइन से उठाकर यह नहीं कह सकते कि चलो, मिसाइल बनाते हैं।”

बड़ा संदेश साफ है

नई H-1B नीति का मूल लक्ष्य नौकरियाँ छीनना नहीं बल्कि ट्रेनिंग देना है। अमेरिका विशेषज्ञों को बुलाएगा, अपनी वर्कफ़ोर्स को अपस्किल करेगा, और उसके बाद उद्योगों को अमेरिकी कामगारों के हाथों में सौंप देगा।

अमेरिका विदेशी टैलेंट का इस्तेमाल पुल की तरह करना चाहता है—अस्थायी तौर पर, लेकिन रणनीतिक रूप से।

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