भारत की आर्थिक संप्रभुता और मजबूत वित्तीय स्थिति को वैश्विक पटल पर कमजोर दिखाने की एक और अंतरराष्ट्रीय साजिश आज पूरी तरह बेनकाब हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मीडिया के एक वर्ग में चल रही उन तमाम खबरों और अफवाहों का सिरे से खंडन कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि केंद्रीय बैंक ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर अपना सोना बेच दिया है। बुधवार, 3 जून 2026 को एक आधिकारिक और बेहद कड़ा बयान जारी करते हुए आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास मौजूद भौतिक सोने (Physical Gold) के भंडार में कोई कमी नहीं आई है और यह 880.52 टन पर पूरी तरह बरकरार है। इसके साथ ही सरकार की प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक टीम ने भी इस खबर को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक करार दिया है।
दरअसल, यह पूरा विवाद एक विदेशी और पश्चिमी मीडिया समूह की उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया (यूएस-ईरान युद्ध) में जारी भीषण सैन्य टकराव के चलते पैदा हुए वैश्विक आर्थिक दबाव और रुपये की स्थिति को संभालने के लिए आरबीआई ने पिछले दो हफ्तों में लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बाजार में बेच दिया है। इस भ्रामक रिपोर्ट के आते ही देश के भीतर सक्रिय कुछ वामपंथी और छद्म-आर्थिक विश्लेषकों ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर डर का माहौल बनाना शुरू कर दिया था। लेकिन आरबीआई ने अपने मासिक बुलेटिन के ताजा आंकड़े सार्वजनिक कर इन अफवाहबाजों को करारा जवाब दिया है। डेटा के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी घटने के बजाय और ज्यादा बढ़ी है। सितंबर 2025 के अंत में कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 16.70 प्रतिशत और 22 मई 2026 तक 16.85 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है।
राष्ट्रवादी विचारकों और प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की मजबूत नीतियों के कारण आज भारत का खजाना इतिहास के सबसे सुरक्षित और मजबूत दौर में है। वैश्विक स्तर पर सोने की बढ़ती कीमतों के कारण भारत के स्वर्ण भंडार की कुल वैल्यू भी 6.91 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 11.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। पश्चिमी लॉबी और देश विरोधी ताकतें यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं कि दुनिया भर में जारी युद्ध और भारी मंदी के बीच भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है, इसलिए भारतीय बाजार में निवेशकों को डराने के लिए ऐसी झूठी खबरें प्लांट की जा रही हैं। आरबीआई ने देश के नागरिकों और निवेशकों को सख्त सलाह दी है कि वे ऐसी किसी भी असत्यापित और मनगढ़ंत अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर भरोसा न करें और केवल रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले आधिकारिक आंकड़ों को ही सच मानें।











