नई दिल्ली/धनबाद: झारखंड के धनबाद और उसके आस-पास के इलाकों में सक्रिय अवैध कोयला माफिया और सिंडिकेट के खिलाफ मोदी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक करते हुए ‘जीरो कोल लीकेज को तत्काल प्रभाव से लागू करने का कड़ा निर्देश दिया है। गृह मंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि देश के सार्वजनिक संसाधनों और काले सोने (कोयले) की चोरी करने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर कड़ाई से बख्शा नहीं जाएगा। इस हाई-लेवल आदेश के बाद कोयला माफियाओं और अवैध परिवहन करने वाले गिरोहों में भयंकर सन्नाटा पसर गया है।
इस नए और कड़े प्लान के तहत गृह मंत्रालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों को ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ के तहत बेहद आक्रामक और असीमित शक्तियां सौंप दी हैं। अब सुरक्षा एजेंसियों को कोर्ट में सीधा केस दर्ज करने, अवैध कोयले के संदिग्ध ठिकानों पर सीधे घुसकर तलाशी लेने और जब्ती अभियान चलाने के साथ-साथ इसमें इस्तेमाल होने वाले सभी औजारों, मशीनों और वाहनों को कड़ाई से जब्त करने का पूरा कानूनी अधिकार होगा। इतना ही नहीं, संवेदनशील और डार्क ज़ोन वाले इलाकों में पैनी नजर रखने के लिए सीआईएसएफ की ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ (QRT) गठित की जा रही है और ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ के हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से पल-पल की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
केंद्र सरकार का यह कड़ा और पारदर्शी कदम उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और विपक्ष के उन झूठे विश्लेषकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो देश की कानून-व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर भ्रामक नैरेटिव फैलाते रहते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर चल रहे गृह मंत्रालय ने इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए अब जीएसटी (GST) अधिकारियों को भी इस सुरक्षा घेरे में शामिल कर लिया है, जिससे कोयले के हर एक कंसाइनमेंट के ‘ई-वे बिल’ (e-way bills) का कड़ाई से मिलान किया जा सके। सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा बलों की इस नई और कड़क ‘बेंच स्ट्रेंथ’ के दम पर कोयले की अवैध सप्लाई चेन को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।








