उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर दागीं कई बैलिस्टिक मिसाइलें, जापान और दक्षिण कोरिया में हाई अलर्ट

पूर्वी एशिया में एक बार फिर युद्ध की आहट तेज हो गई है क्योंकि उत्तर कोरिया ने रविवार सुबह अपनी पूर्वी तटरेखा से कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। दक्षिण कोरियाई सेना और जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह प्रक्षेपण सुबह लगभग 6:10 बजे उत्तर कोरिया के सिनपो शहर के पास से किया गया। इन मिसाइलों ने हवा में लगभग 140 किलोमीटर की दूरी तय की और अंततः जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर समुद्र में जा गिरीं। इस ताजा उकसावे के बाद जापान सरकार ने तत्काल प्रभाव से ‘हाई अलर्ट’ जारी कर दिया है और शीर्ष स्तरीय संकट प्रबंधन प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए हैं। जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोशल मीडिया पर इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उनका प्रशासन पूरी तत्परता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस घटना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है। सियोल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जिसमें उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और परमाणु क्षमता विस्तार पर चर्चा की गई। दक्षिण कोरियाई सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने एक बयान में कहा कि वे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इन मिसाइलों के तकनीकी विवरणों का विश्लेषण कर रहे हैं। गौरतलब है कि साल 2026 में यह उत्तर कोरिया का सातवां और केवल अप्रैल महीने में चौथा बड़ा मिसाइल परीक्षण है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा बार-बार किए जा रहे ये परीक्षण क्षेत्र में अपनी धाक जमाने और अमेरिका के साथ संभावित वार्ता से पहले अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु हथियार बनाने की क्षमताओं में “बेहद गंभीर” प्रगति की है, जिसमें नई यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं का निर्माण भी शामिल है। यह मिसाइल लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब मई के मध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है, जहाँ उत्तर कोरिया का मुद्दा प्राथमिकता पर रहने की उम्मीद है। उत्तर कोरिया के इस कदम को अमेरिका की ईरान नीति और पश्चिमी एशिया में उसकी व्यस्तता का फायदा उठाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। वर्तमान में, दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका ने अपनी त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत कर दिया है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

 

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