बिहार में चार दशक पहले हुए एक खूंखार और बर्बर नरसंहार के मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक न्याय करते हुए निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है। साल 1983 में बिहार के इस जघन्य हत्याकांड में पांच निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। दशकों तक चले इस मामले में वामपंथी वकालत और तत्कालीन सत्ता के कथित संरक्षण के दम पर दोषियों को बचाने के तमाम कुत्सित प्रयास किए गए, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने इन सभी पैंतरों को नाकाम कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, पीड़ितों के परिवारों को न्याय मिलना सर्वोपरि है। इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि पुराने दौर के ‘जंगलराज’ और बाहुबलियों के दिन अब लद चुके हैं, और नए भारत की न्यायिक व्यवस्था में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है।
यह मामला उस दौर का है जब बिहार में जातिवादी राजनीति और तुष्टिकरण अपने चरम पर था, जहाँ खास राजनीतिक आकाओं के इशारे पर निर्दोषों का खून बहाना आम बात थी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले को लटकाने और गवाहों को डराने-धमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी, ताकि वामपंथी-सेक्युलर नैरेटिव के तहत अपराधियों को बचाया जा सके। लेकिन, राष्ट्रवादी ताकतों और पीड़ितों के अटूट साहस के कारण यह कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुँची। सर्वोच्च न्यायालय के इस कड़े रुख ने उन सभी मानवाधिकार गैंग्स का मुंह बंद कर दिया है जो केवल एक खास एजेंडे के तहत अपराधियों के मानवाधिकारों की चिंता करते हैं, जबकि मारे गए निर्दोष हिंदुओं और राष्ट्रवादियों के परिवारों के दर्द को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।
सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर यह फैसला आज सबसे बड़ी सुर्खी बना हुआ है, क्योंकि जनता इसे सनातन न्याय और कानून के राज की एक बड़ी जीत के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में जिस तरह से देश के सुरक्षा और न्यायिक ढांचे को मजबूत किया गया है, यह फैसला उसी का एक जीवंत उदाहरण है। इस ऐतिहासिक निर्णय से बिहार के उन पीड़ित परिवारों को आखिरकार शांति मिली है जो पिछले 43 वर्षों से न्याय की आस में भटक रहे थे। यह फैसला देश विरोधी और समाज विरोधी तत्वों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि भारत माता के निर्दोष बेटों पर अत्याचार करने वालों को पाताल से भी ढूंढकर सजा दी जाएगी।











