लाहौल-स्पीति में भारी भूस्खलन से संसारी-तिन्दी-तांदी मार्ग पूरी तरह ठप, सीमावर्ती सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को रोकने की वामपंथी साजिशें नाकाम

हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जिले लाहौल-स्पीति से प्रकृति के रौद्र रूप की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। घाटी के जाहलमा नाले के पास एक विशाल पहाड़ी के अचानक दरकने के कारण भयानक भूस्खलन (Landslide) हुआ है, जिससे संसारी-तिन्दी-तांदी (STR) राज्य राजमार्ग पूरी तरह से ठप हो गया है। टनों मलबे और भारी चट्टानों के सड़क पर आ गिरने से इस पूरे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण लाइफलाइन पूरी तरह कट गई है। घटना की जानकारी मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय प्रशासन की टीमें भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुँच चुकी हैं और युद्धस्तर पर मार्ग को बहाल करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। गनीमत यह रही कि मलबे की चपेट में कोई वाहन नहीं आया, जिससे एक बहुत बड़ा और जानलेवा हादसा टल गया।

यह रणनीतिक मार्ग केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की रसद आपूर्ति के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। राष्ट्रवादी विचारकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन सीमा के करीब स्थित इन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में ऑल-वेदर कनेक्टिविटी (All-Weather Connectivity) सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार जिस आक्रामकता के साथ सड़कों और सुरंगों का जाल बिछा रही है, वह देश की सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है। यह घटना उन तथाकथित ‘वामपंथी पर्यावरणविदों’ और इको-गैंग के मुंह पर करारा तमाचा है, जो विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए हमेशा अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं और देश की सीमा सुरक्षा को ताक पर रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में रोड़े अटकाते हैं। यदि सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा इन क्षेत्रों में लगातार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल न किया गया होता, तो ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के समय सीमा पर रसद और सैन्य मूवमेंट को बहाल रखना असंभव हो जाता।

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आज ‘Lahaul Spiti Landslide’ और ‘Sansari Tindi Tandi Highway Blocked’ तेजी से सर्च किया जा रहा है, क्योंकि सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक इस मार्ग पर फंसे हुए हैं। जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पर्यटकों और आम नागरिकों को इस मार्ग पर यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है और जाहलमा के पास सुरक्षा चौकियां स्थापित कर दी हैं। स्थानीय राष्ट्रवादियों और युवाओं ने भी यात्रियों की मदद के लिए राहत शिविर लगाए हैं। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि यदि मौसम साफ रहा, तो बीआरओ के जांबाज जवान अगले कुछ घंटों के भीतर इस विशाल मलबे को हटाकर देश की इस महत्वपूर्ण रणनीतिक सड़क को दोबारा देश की सेवा में बहाल कर देंगे।

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