भारत की मेजबानी में राजधानी नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में ‘क्वाड’ (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय बैठक संपन्न हुई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री ने हिस्सा लिया। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और समुद्री सीमाओं पर बढ़ते गतिरोध के बीच आयोजित हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कानून आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक की शुरुआत करते हुए स्पष्ट किया कि क्वाड किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी क्षेत्र के निर्माण के पक्ष में है। सभी सदस्य देशों ने एक सुर में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एकतरफा यथास्थिति बदलने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (UNCLOS) के पालन पर जोर दिया।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चारों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबले और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience) को लेकर व्यापक सहमति बनी है। डॉ. जयशंकर ने बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि क्वाड देशों ने हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में अवैध शिकार (Illegal Fishing) पर लगाम लगाने तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए ‘मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ पहल को और अधिक मजबूत करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, सेमीकंडक्टर निर्माण, 5जी और 6जी जैसी उभरती हुई क्रिटिकल तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी ठोस चर्चा हुई, ताकि इस क्षेत्र में किसी एक देश के आर्थिक एकाधिकार को तोड़ा जा सके। बैठक में मध्य पूर्व के संकट, यूक्रेन युद्ध और हिंद-प्रशांत की सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले परोक्ष प्रभावों का भी गहराई से विश्लेषण किया गया।
रणनीतिक जानकारों के अनुसार, नई दिल्ली में हुई यह बैठक क्वाड के भविष्य के एजेंडे को तय करने में मील का पत्थर साबित होगी। चारों देशों ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विकासशील देशों को कर्ज के जाल से बचाने और उनके लिए पारदर्शी वित्तीय विकल्प उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। डॉ. जयशंकर ने कहा कि क्वाड अब केवल एक विचार नहीं, बल्कि वैश्विक भलाई का एक मजबूत माध्यम बन चुका है जो स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर मिलकर काम कर रहा है। बैठक के समापन पर एक साझा घोषणापत्र (Joint Statement) भी जारी किया गया, जिसने यह साफ कर दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए क्वाड देश आने वाले समय में अपने सैन्य और राजनयिक तालमेल को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।











