जकार्ता/नई दिल्ली: वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव का एक बेहद अद्भुत, कड़क और गौरवशाली अध्याय इंडोनेशिया की धरती पर लिखा गया है। इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक समागम के दौरान वहां के ऐतिहासिक और नौवीं शताब्दी के प्राचीन प्रम्बानन मंदिर (Prambanan Temple) परिसर में ‘ओम नमः शिवाय’ और वैदिक मंत्रोच्चार की गगनभेदी गूंज सुनाई दी। सबसे विशेष बात यह रही कि इस बेहद पवित्र और कड़े पल के साक्षी खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने इस पूरे वैश्विक आयोजन को एक नए और ऐतिहासिक शिखर पर पहुंचा दिया।
प्रम्बानन मंदिर में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान में इंडोनेशियाई कलाकारों और स्थानीय हिंदू समुदाय के कद्दावर विद्वानों ने पारंपरिक वेशभूषा में शिव स्तुति की। पीएम मोदी ने मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन करने के बाद भारतीय और इंडोनेशियाई संस्कृति के इस गहरे ऐतिहासिक सिंडिकेट की सराहना की। कूटनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को बेहद कड़ा माना जा रहा है, जिसने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने चोल और कलिंग साम्राज्य के समुद्री व्यापारिक और धार्मिक संबंधों की ‘बेंच स्ट्रेंथ’ को पूरी दुनिया के सामने एक नए अवतार में पेश किया है।
इंडोनेशिया की धरती से उठी सनातन संस्कृति की यह कड़क गूंज उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और पश्चिमी विचारकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो हमेशा भारत की वैश्विक कूटनीति और सॉफ्ट पावर को कमतर आंकने की ओछी कोशिश करते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन के साथ आगे बढ़ रहे नए भारत ने साफ कर दिया है कि वह आर्थिक और सामरिक मोर्चे के साथ-साथ दुनिया भर में बिखरी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को कड़ाई से पुनर्जीवित करने के लिए पूरी तरह फ्रंट-फुट पर खेल रहा है। मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में पीएम मोदी की मौजूदगी में गूंजा यह महामंत्र साबित करता है कि भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद आज सीमाओं को लांघकर पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरो रहा है।









