देहरादून/चमोली: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसूनी बादलों ने एक बार फिर भयंकर तबाही मचानी शुरू कर दी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में पिछले 24 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते कई पहाड़ी इलाकों में भीषण भूस्खलन (Landslides) हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण गढ़वाल और कुमाऊं मंडल को जोड़ने वाले बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7) समेत कई बेहद अहम और संवेदनशील रास्ते कड़ाई से बंद हो गए हैं। राजमार्ग ठप होने की वजह से सैकड़ों तीर्थयात्री, स्थानीय लोग और मालवाहक वाहन अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं, जिससे पहाड़ी रास्तों पर भारी अव्यवस्था फैल गई है।
मौसम विभाग (IMD) द्वारा उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का कड़ा ‘रेड और ऑरेंज अलर्ट’ जारी किए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। भूस्खलन की सबसे कड़क मार चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में पड़ी है, जहां पहाड़ों से दरक कर भारी बोल्डर और मलबे सड़कों पर आ गिरे हैं। सीमा सड़क संगठन (BRO) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमों को भारी मशीनों के साथ मलबे को हटाने के लिए मोर्चे पर उतारा गया है, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों और कड़क मानसूनी बारिश के कारण राहत और बचाव कार्य में भयंकर बाधा आ रही है।
प्रशासन का यह मुस्तैद और त्वरित ऑन-ग्राउंड रिस्पॉन्स उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और आपदा-समीक्षकों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो हमेशा उत्तराखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट्स को बदनाम करने का एजेंडा चलाते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन के साथ आगे बढ़ रही राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को चौबीसों घंटे ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) मोड पर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं। राज्य आपदा प्रतिपादन बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस की प्रशासनिक ‘बेंच स्ट्रेंथ’ को पूरी तरह संवेदनशील पॉइंट पर तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन कड़े संकट से समय रहते निपटा जा सके और यात्रियों की सुरक्षा को अक्षुण्ण रखा जा सके।





