विक्टोरिया/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिवसीय ऐतिहासिक सेशल्स (Seychelles) दौरे के बीच एक बहुत बड़ी और कड़क वैश्विक खबर सामने आई है। सेशल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) से नवाजा है। यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले पीएम मोदी दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय नेता बन गए हैं। हिंद महासागर में भारत की बढ़ती ‘बेंच स्ट्रेंथ’ और रणनीतिक दबदबे का लोहा मानते हुए सेशल्स ने यह कड़ा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक मंच पर भारत के रसूख को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
इस राजकीय सम्मान के ऐतिहासिक संदर्भ को देखें तो भारत और सेशल्स के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि बेहद गहरे सैन्य और सामरिक विश्वास पर टिके हैं। यह वही सेशल्स है जिसे साल 1986 में भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन फ्लॉवर मॉर्फिन’ (Operation Flowers Are Blooming) के तहत एक बड़े सैन्य तख्तापलट (Coup) से बचाया था। तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस अल्बर्ट रेने के खिलाफ जब भाड़े के सैनिकों और बागियों ने तख्तापलट की साजिश रची थी, तब भारत ने तुरंत अपनी नौसेना का युद्धपोत आईएनएस विंध्यगिरि भेजकर उस कूटनीतिक संकट को कड़ाई से कुचल दिया था। आज 40 साल बाद, सेशल्स के राष्ट्रीय दिवस की ‘गोल्डन जुबली’ के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री को यह सर्वोच्च सम्मान मिलना उस अटूट सुरक्षा साझेदारी की कड़क तस्दीक करता है।
भारत की यह कूटनीतिक महा-विजय उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और चीनी विस्तारवाद के पैरोकारों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो हिंद महासागर में भारत के प्रभाव को कमतर आंकने का झूठा नैरेटिव गढ़ रहे थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और ‘विज़न महासागर’ (Vision MAHASAGAR) के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे नया भारत आज न केवल एक सुरक्षा प्रदाता (Security Provider) बनकर उभरा है, बल्कि समुद्री सीमाओं की रक्षा में अपनी अजेय धाक जमा चुका है। इस दौरे पर पीएम मोदी द्वारा सेशल्स को फास्ट पेट्रोल वेसल ‘L’Espoir’ सौंपना और 1250 करोड़ रुपये की कड़क लाइन ऑफ क्रेडिट देना साफ दिखाता है कि हिंद महासागर में भारत की कूटनीति पूरी तरह फ्रंट-फुट पर है।











