नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुई भीषण हिंसा और तोड़फोड़ के मुख्य सूत्रधार को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बेहद गुप्त और सटीक ऑपरेशन के तहत तमिलनाडु से गिरफ्तार कर लिया है। पिछले कई दिनों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा यह मास्टरमाइंड अपनी पहचान छुपाकर दक्षिण भारत में छिपा हुआ था। यूपी एसटीएफ की एक विशेष टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी सर्विलांस का पीछा करते हुए उसे तमिलनाडु के एक छोटे से कस्बे से धर दबोचा। इस गिरफ्तारी को नोएडा पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि यह आरोपी उन कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जो सीमा पार के हैंडलर्स और स्थानीय उपद्रवियों के बीच की कड़ी मानी जा रही हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसे बहुत ही शातिराना तरीके से व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्लान किया गया था। गिरफ्तार किए गए आरोपी पर आरोप है कि उसने ही भीड़ को उकसाने वाले संदेश तैयार किए थे और अफवाहें फैलाई थीं कि पुलिस की कार्रवाई में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई है। नोएडा पुलिस कमिश्नरेट और एसटीएफ की संयुक्त जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी ने हिंसा के तुरंत बाद अपना मोबाइल फोन नष्ट कर दिया था और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस के पास मौजूद कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचाने में मदद की।
फिलहाल, एसटीएफ की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर नोएडा ला रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है, विशेष रूप से उन फंडिंग स्रोतों के बारे में जिनका उपयोग इस बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने के लिए किया गया था। इस मामले में पुलिस पहले ही 60 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है, लेकिन इस मास्टरमाइंड की पकड़ में आने से पूरी साजिश का चेहरा साफ हो गया है। सरकार की ओर से भी स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य की औद्योगिक स्थिरता और शांति को भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया है कि कानून के लंबे हाथ अपराधियों को देश के किसी भी कोने से ढूंढ निकालने में सक्षम हैं।











