नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा: पाकिस्तानी हैंडलर्स ने सोशल मीडिया के जरिए भड़काई थी आग, पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य आए सामने

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में बीते दिनों हुई हिंसक घटनाओं को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। गौतम बुद्ध नगर पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि 13 अप्रैल को भड़की हिंसा के पीछे सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर्स का हाथ था। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कुछ विशेष सोशल मीडिया हैंडल्स का इस्तेमाल करके स्थानीय श्रमिकों को उकसाया गया और उन्हें हिंसक प्रदर्शन के लिए मजबूर किया गया। तकनीकी जांच और ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) से मिली रिपोर्ट के अनुसार, दो प्रमुख हैंडल—’प्राउड इंडियन नवी’ और ‘मीर इलियास आईएनसी’—का आईपी एड्रेस और वीपीएन लोकेशन पाकिस्तान पाया गया है। इन हैंडल्स से पुलिस फायरिंग में श्रमिकों की मौत जैसी झूठी और भ्रामक खबरें फैलाई गई थीं, जिससे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की।

पुलिस का दावा है कि ये सोशल मीडिया अकाउंट्स भले ही कुछ समय पहले भारत में बनाए गए थे, लेकिन पिछले तीन महीनों से इन्हें सीधे तौर पर पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था। जब 13 अप्रैल को दोपहर के समय पुलिस ने स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया था, तभी इन हैंडल्स से पोस्ट किया गया कि पुलिस कार्रवाई में दर्जनों श्रमिक मारे गए हैं। इस झूठी खबर ने आग में घी का काम किया और घर लौट रहे श्रमिक दोबारा सड़कों पर उतर आए। जांच में यह भी पता चला है कि इन डिजिटल साजिशों के साथ-साथ जमीन पर भी कुछ लोगों ने माहौल खराब करने की कोशिश की थी। ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ से जुड़े रूपेश राय, मनीषा चौहान और आदित्य आनंद जैसे लोगों ने व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से भीड़ को संगठित किया था। पुलिस ने अब तक इस मामले में 13 एफआईआर दर्ज की हैं और 62 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

इस खुलासे के बाद नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। हालांकि, वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और अधिकांश कारखानों में काम दोबारा शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों की वेतन वृद्धि की मांगों पर विचार करते हुए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे अब शांति का माहौल लौट रहा है। पुलिस कमिश्नर ने जनता और श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर आने वाली अपुष्ट जानकारियों को साझा करने से बचें। सुरक्षा एजेंसियां अब उन स्थानीय मददगारों की पहचान करने में जुटी हैं जो इन पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे। यह मामला एक बार फिर डिजिटल युग में ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ के खतरे को रेखांकित करता है, जहाँ पड़ोसी मुल्क भारत की आंतरिक शांति और औद्योगिक स्थिरता को नुकसान पहुँचाने के लिए सोशल मीडिया का हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

 

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