जम्मू/श्रीनगर: सनातन आस्था के सबसे बड़े और कड़े प्रतीक ‘श्री अमरनाथ जी यात्रा’ (Amarnath Yatra) का बेहद पावन और कड़ा शंखनाद हो चुका है। जम्मू के ऐतिहासिक बेस कैंप भगवती नगर से बम-बम भोले और बाबा बर्फानी के गगनभेदी जयकारों के बीच साधु-संतों और अकीदतमंदों का पहला कड़ा जत्था कश्मीर के पवित्र गुफा की ओर रवाना हो गया है। पूरी घाटी इस वक्त शिवभक्ति के कड़े रंग में सराबोर है। बेस कैंप से रवाना होते समय साधु-संतों के चेहरे पर एक अद्भुत कड़ा उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने मीडिया से बात करते हुए साफ शब्दों में कहा कि इस पावन यात्रा का अनुभव पूरी तरह दिव्य और अद्भुत है।
इस साल की अमरनाथ यात्रा को लेकर केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के लिहाज से अब तक की सबसे कड़ी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ मैदान में उतारी है। ड्रोन कैमरों, अत्याधुनिक सैटेलाइट ट्रैकिंग, और चप्पे-चप्पे पर कड़े अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य और ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) मोड पर रखा गया है। इसके अलावा, लखनपुर से लेकर पवित्र गुफा तक श्रद्धालुओं के लिए कड़े मेडिकल कैंप, आधुनिक टेंट सिटी और लंगरों की ऐसी कड़क व्यवस्था की गई है, जिससे देश-विदेश से आने वाले शिवभक्तों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढील या असुविधा का सामना न करना पड़े।
अमरनाथ यात्रा का यह भव्य और कड़ा आगाज उन अलगाववादी सिंडिकेट्स, आतंकी आकाओं और वामपंथी टूलकिट गिरोहों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो हमेशा कश्मीर घाटी के माहौल को लेकर डर और असुरक्षा का झूठा प्रोपेगैंडा फैलाते रहते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा नया भारत आज पूरी कड़ाई के साथ अपने धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा कर रहा है। साधु-संतों के इस पहले कड़े जत्थे ने साफ संदेश दे दिया है कि सनातन संस्कृति की इस महान यात्रा को कोई भी राष्ट्र-विरोधी ताकत बाधित नहीं कर सकती, और कश्मीर की धरती पर बाबा बर्फानी के भक्तों का यह कड़ा सैलाब भारत की सांस्कृतिक अखंडता को और अधिक मजबूत कर रहा है।









