अयोध्या/नई दिल्ली: राम मंदिर चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के महा-विवाद के बीच अयोध्या की धरती से इस वक्त का सबसे बड़ा और कड़ा प्रशासनिक भूचाल सामने आ रहा है। मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री पद से इस्तीफे की खबरों के बाद अब स्थानीय कानूनी मोर्चे पर भी भारी उबाल आ गया है। फैजाबाद (अयोध्या) बार एसोसिएशन ने एक बेहद आक्रामक और कड़ा प्रस्ताव पास करते हुए पूर्व ट्रस्टी चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव को 3 दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की खुली चेतावनी दे दी है। वकीलों के इस कड़े अल्टीमेटम के बाद अयोध्या के प्रशासनिक और धार्मिक गलियारों में भयंकर हड़कंप मच गया है।
बार एसोसिएशन के कद्दावर पदाधिकारियों ने एक आपातकालीन बैठक बुलाकर रामलला के खजाने की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले आंतरिक सिंडिकेट पर तीखा प्रहार किया। एसोसिएशन ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रभु श्री राम के मंदिर को अपने कथित घोटालों और रसूख के दम पर बदनाम करने वाले इन तीनों चेहरों को अयोध्या की पावन भूमि पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वकीलों ने कड़ा स्टैंड लेते हुए एलान किया है कि यदि ये तीनों नाम 3 दिनों के भीतर अयोध्या से बाहर नहीं गए, तो बार एसोसिएशन इनके खिलाफ सड़कों पर उतरकर कड़ा और आक्रामक विरोध प्रदर्शन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
वकीलों की यह कड़क और त्वरित ललकार उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और सनातन-विरोधी गिरोहों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो इस विवाद की आड़ में पूरे राम जन्मभूमि आंदोलन को ही कटघरे में खड़ा करने की ओछी कोशिश कर रहे थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर चल रहे स्थानीय समाज ने साफ संदेश दे दिया है कि राम मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले रसूखदारों को समाज में पैर टिकाने की जगह नहीं मिलेगी। कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे इस कड़े कदम के बाद आरोपियों की कानूनी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ पूरी तरह बिखर चुकी है और मंदिर की पवित्रता बहाल करने का संकल्प और मजबूत हो गया है।











