पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव अब पूरी तरह से एक भीषण और विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर ‘बंदर अब्बास’ पर रातभर की गई भीषण सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कुवैत में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य एयरबेस पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए हैं। गुरुवार, 28 मई 2026 की सुबह ईरान की कुख्यात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक बयान जारी कर घोषणा की कि उनकी एलीट फोर्स ने ठीक सुबह 4:50 बजे उस अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया, जिसका इस्तेमाल बंदर अब्बास पर हमले के लिए किया गया था। ईरान के इस आक्रामक रुख ने पश्चिमी देशों के कमांड सेंटरों को हिलाकर रख दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे बड़े चोकपॉइंट पर अमेरिकी दादागिरी को अब खुली चुनौती मिल रही है।
इस भयंकर सैन्य टकराव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास उड़ान भर रहे ईरान के चार सुसाइड ड्रोन्स को मार गिराया। इसके तुरंत बाद, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास स्थित ईरान के एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को हवाई मिसाइलों से उड़ा दिया, जो पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था। हालांकि अमेरिका इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रहा है, लेकिन आईआरजीसी (IRGC) ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान की नौसेना ने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर सीधी गोलीबारी की और बिना अनुमति मार्ग बदलने वाले चार अन्य विदेशी जहाजों को बंधक बना लिया, जिससे साफ है कि ईरान वैश्विक नौसैनिक नियमों को मानने से पूरी तरह इनकार कर चुका है।
यह भीषण सैन्य तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस कैबिनेट बैठक के ठीक 24 घंटे बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने ओमान और ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किसी भी तरह के नियंत्रण को लेकर सीधे उड़ा देने (Blow them up) की खुली परमाणु धमक दी थी। ट्रंप ने कहा था कि ईरान इस समय प्रतिबंधों के कारण अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है, लेकिन ईरान द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर किए गए इस सीधे रॉकेट हमले ने ट्रंप के दावों की हवा निकाल दी है। राष्ट्रवादी विचारकों और अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भड़का यह युद्ध वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह तबाह कर सकता है, क्योंकि दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इस समय इंटरनेट और गूगल सर्च इंजन पर ‘US Iran War Live Updates’ शीर्ष पर ट्रेंड कर रहा है।











