ट्रंप की परमाणु धमक से हिला मध्य पूर्व: ओमान और ईरान को व्हाइट हाउस की दोटूक चेतावनी, कहा— स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दादागिरी की तो उड़ा देंगे

वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद आक्रामक और अभूतपूर्व बयान देकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भूचाल ला दिया है। बुधवार, 27 मई 2026 को व्हाइट हाउस में हुई एक कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर किसी भी देश का नियंत्रण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा अमेरिका के साथ एक कथित समझौते के मसौदे की खबरों के तुरंत बाद, जिसमें ईरान और ओमान द्वारा संयुक्त रूप से जलडमरूमध्य का ट्रैफिक नियंत्रित करने और टैक्स वसूलने की बात कही गई थी, ट्रंप ने इस पूरे प्रस्ताव को कचरे के डिब्बे में डाल दिया। ट्रंप ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र (International Waters) है, इस पर किसी का नियंत्रण नहीं होगा, बल्कि अमेरिकी सेना इस पर पूरी निगरानी रखेगी।

इस दौरान ट्रंप ने अमेरिका के पुराने सहयोगी देश ओमान को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और सीधी सैन्य धमक दे डाली। जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या वे ईरान और ओमान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण देने वाले किसी अल्पकालिक समझौते को स्वीकार करेंगे, तो ट्रंप ने दोटूक कहा कि ओमान को भी बाकी सभी देशों की तरह शांति से व्यवहार करना होगा, वरना हम उन्हें पूरी तरह उड़ा देंगे (Blow them up)। ट्रंप के इस ‘गनबोट डिप्लोमेसी’ वाले बयान की अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने भी आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट जारी कर पुष्टि की है, जिसने वामपंथी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के खेमे में हड़कंप मचा दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख यह साफ करता है कि अमेरिका वैश्विक तेल आपूर्ति के 20 प्रतिशत हिस्से को संभालने वाले इस चोकपॉइंट पर किसी भी मुस्लिम देश या विरोधी ताकतों की दादागिरी स्थापित नहीं होने देगा।

कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी साफ किया कि ईरान के साथ चल रही युद्धविराम की वार्ताएं तभी सफल होंगी जब अमेरिका की सभी शर्तें पूरी होंगी, जिसमें सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को चीन या रूस जैसे देशों के कब्जे में सौंपने के सख्त खिलाफ हैं। राष्ट्रवादी विचारकों के अनुसार, ट्रंप का यह कड़ा स्टैंड उन छद्म-सेक्युलर और वैश्विक वामपंथी ताकतों के गाल पर करारा तमाचा है जो लगातार प्रतिबंधों को हटाने और अमेरिका को कमजोर दिखाने का नैरेटिव चला रहे थे। नए वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका की यह आक्रामक विदेश नीति स्पष्ट संदेश देती है कि वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ और ‘नेशन फर्स्ट’ की नीतियां ही दुनिया में कानून का राज स्थापित रख सकती हैं।

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