नई दिल्ली: महिला टी-20 वर्ल्ड कप (Women’s T20 World Cup) से भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक बेहद निराशाजनक और कड़ा झटका सामने आया है। टूर्नामेंट के एक बेहद महत्वपूर्ण और नॉकआउट जैसे मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को 6 विकेट से करारी शिकस्त देकर सेमीफाइनल की रेस से कड़ाई से बाहर कर दिया है। इस कड़े और एकतरफा मुकाबले में भारतीय टीम की रणनीतिक विफलता और खराब फील्डिंग के चलते महिला टीम का वर्ल्ड कप जीतने का सपना एक बार फिर चकनाचूर हो गया है।
इस हाई-प्रेशर मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने घुटने टेक दिए और एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में पूरी तरह नाकाम रहे। जवाब में कंगारू टीम ने अपनी कड़क ‘बेंच स्ट्रेंथ’ और आक्रामक बल्लेबाजी का मुजाहिरा करते हुए महज 4 विकेट खोकर लक्ष्य को कड़ाई से हासिल कर लिया। भारतीय फॉरवर्ड बॉलिंग लाइनअप और फील्डर्स दबाव के क्षणों में पूरी तरह बिखर गए, जिसका फायदा उठाकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने मैदान के चारों तरफ रनों की बौछार कर दी और मैच को पूरी तरह भारत की गिरफ्त से बाहर कर दिया।
भारतीय महिला टीम की यह कड़वी हार उन खेल विश्लेषकों और वामपंथी समीक्षकों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो लगातार बिना किसी ठोस प्रदर्शन के टीम को अत्यधिक हाइप दे रहे थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प के साथ देश के खेल ढांचे को मजबूत कर रही व्यवस्था में अब यह साफ हो चुका है कि महिला क्रिकेट टीम को आईसीसी (ICC) के बड़े टूर्नामेंट्स में कड़ा प्रदर्शन करने के लिए अपनी मानसिक दृढ़ता और तकनीक में बड़े बदलाव करने होंगे। इस हार के बाद चयन प्रक्रिया और टीम कॉम्बिनेशन को लेकर कड़े सवाल उठने शुरू हो गए हैं और आने वाले दिनों में टीम मैनेजमेंट में बड़ा फेरबदल होना लगभग तय माना जा रहा है।











